राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं मस्तिष्‍क विज्ञान संस्‍थान का 16वां दीक्षांत समारोह आयोजित

बंगलौर: राष्‍ट्रीय मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य एवं मस्तिष्‍क विज्ञान संस्‍थान का 16वां दी‍क्षांत समारोह आज बंगलौर में आयोजित किया गया। इस समारोह को भारत के उपराष्‍ट्रपति मोहम्‍मद हामिद अंसारी ने सम्‍बोधित किया। इस अवसर पर उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा की मांग और उसकी आपूर्ति के बीच अत्‍यधिक अंतर मौजूद है। मानसिक रोगों से पीड़ि‍त दो ति‍हाई से अधि‍क लोगों को इलाज हासि‍ल नहीं होता। उपराष्‍ट्रपति‍ने कहा कि‍मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध कराने के लिए बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन में सुधार समस्‍या का एक पहलू है। इससे भी बड़ी समस्‍या देश में मानसिक बीमारी को कलंक के रूप में समझा जाना है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा और जागरुकता अभियानों के जरिए एचआईवी/एड्स रोगियों को कलंक से बचाने के लिए बहुत प्रयास किए गए हैं, लेकिन मानसिक विकारों के संबंध में हम ऐसा करने में असमर्थ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमें सार्वजनिक जागरुकता बढ़ाने के जरिए कलंक और भेदभाव को कम करना चाहिए।

मोहम्‍मद हामिद अंसारी ने कहा कि हमें महिलाओं, बच्‍चों, सामाजिक या पारिवारिक अलगाव झेल रहे लोगों, नशीले पदार्थों या शराब की लत के शिकार लोगों, प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं के शिकार और युद्ध अथवा विवाद के क्षेत्रों में काम कर रहे या वहां रह रहे लोगों जैसे अत्‍यधिक संवेदनशील समूहों पर विशेष रूप से ध्‍यान देना चाहिए। इस तरह के समूहों में रहने वाले लोगों को मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी इलाज की समय पर आवश्‍यकता होती है।

उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि हम सब जानते हैं कि भारत में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कानूनों और नीतियों का व्‍यापक ढांचा उपलब्‍ध है। वर्ष 2003 में राष्‍ट्रीय कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया और नौवीं योजना के दौरान इसके लिए आवंटित कोष की राशि 28 करोड़ को बढ़ाकर 11वीं योजना में 4 अरब रुपये से अधिक कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद स्‍वास्‍थ्‍य पर हमारा खर्च सकल घरेलू उत्‍पाद के अनुपात में सिर्फ 1.27 प्रतिशत ही है, जो अंतरराष्‍ट्रीय मानकों की तुलना में बहुत कम है। स्‍वास्‍थ्‍य पर किए जाने वाले कुल खर्च की तीन चौथाई से अधिक राशि निजी क्षेत्र का व्‍यय है। उपराष्‍ट्रपति ने कहा कि मानिसक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी बुनियादी ढांचे के मामले में हमारे पास दस लाख लोगों पर सिर्फ 25 मानसिक विकार संबंधी बिस्‍तर मौजूद हैं, जबकि दुनिया में यह औसत 169 है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के प्रावधानों के लिए मांग और आपूर्ति के बीच अत्‍यधिक अंतर मौजूद है और हमें इसे दूर करने के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए।

Posted by on January 20, 2012. Filed under प्रमुख समाचार, समाचार. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

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