नयी दिल्ली: पूर्वोत्तर क्षेत्र के कम विकसित ग्रामीण समुदायों का जीवन सुधारने के लिए उन्हें समर्थ बनाने की कोशिशों के तहत सरकार और विश्व बैंक ने 13 करोड़ अमरीकी डॉलर के आईडीए ऋण के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
पूर्वोत्तर ग्रामीण आजीविका परियोजना (एनईआरएलपी) से गांव के गरीब, खासतौर से महिलाओं, बेरोजगार युवकों और सुविधाओं से वंचित लोगों का जीवन सुधरेगा। इसमें चार राज्यों मिजोरम के ऐजल और लुंगलेई; नागालैंड के पेरेन और त्वेनसांग; सिक्किम में पूर्वी जिले के दक्षिण, पश्चिम और 15 पंचायत वार्ड; तथा त्रिपुरा के पश्चिमी और उत्तरी जिलों सहित 8 जिले शामिल हैं।
समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों और तुलनात्मक रूप से विकास की अच्छी सम्भावनाओं के बावजूद पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास के मानदण्डों में देश के अन्य भागों से पीछे है। करीब 35 प्रतिशत ग्रामीण आबादी गरीबी रेखा से नीचे रह रही है; कृषि उत्पादकता कम है और हाई स्कूल स्तर पर पढ़ाई छोड़ने तथा कौशल की कमी के कारण बेरोजगार युवकों की संख्या काफी अधिक है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक विकास को पटरी पर लाने की जरूरत को समझते हुए भारत सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के समर्थन से पूर्वोत्तर क्षेत्र विजन-2020 बनाया।
एनईआरएलपी के लिए समझौते पर वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में संयुक्त सचिव श्री वेणु राजामणि और पूर्वोत्तर ग्रामीण परियोजना की तरफ से परियोजना निदेशक श्री डी.एल. वानखड़ तथा भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर श्री रोबर्टो जाघा ने हस्ताक्षर किये।
परियोजना में समुदायों के लिए एक संस्थागत मंच विकसित करने की व्यवस्था है, जिससे उन्हें निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र और सिविल सोसायटी से जोड़ने तथा उनके रहन-सहन में सुधार के लिए संस्थागत, तकनीकी और वित्तीय क्षमता हासिल करने में मदद मिलेगी। वैश्विक विकास के अनुभव से पता लगता है कि एक घर के एक व्यक्ति खासतौर से कार्यकुशल युवक को मजबूत बनाकर गरीबी को दूर किया जा सकता है।
परियोजना के चार प्रमुख भाग हैं (i) सामाजिक अधिकार प्रदान करना (ii) आर्थिक अधिकार प्रदान करना (iii) साझेदारी विकास (iv) परियोजना प्रबंध।
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