ग्रामसभा विधानसभाओं और संसद से ऊपर: अन्ना हजारे

नई दिल्ली। अन्ना हजारे ने गुरुवार को स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने के लिए एक कानून बनाए जाने का आह्वान किया। अन्ना ने कहा कि ग्रामसभा विधानसभाओं और संसद से ऊपर हैं | उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस तरह का कानून नहीं लाती है तो लोगों को दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के लिए तैयार रहना चाहिए।

अन्ना हजारे की टीम द्वारा ‘रिबिल्डिंग रिपब्लिक’ नाम से प्रसारित किए गए वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि ग्राम सभाएं देश की सबसे बड़ी संरचनाएं है क्योंकि वे अपनी ताकत सीधे जनता से प्राप्त करती है।

हजारे ने कहा, ‘ग्राम सभा देश में सबसे ऊंची प्रणाली है। यह लोकसभा और विधानसभा से ऊपर है। प्रत्येक मतदाता देश का शासक है, इसे सरकार को समझना चाहिए। एक दूसरे स्वतंत्रता संग्राम के लिए लोगों को आगे आना होगा।’ अन्ना हजारे ने कहा कि वह केंद्र और राज्य सरकारों में निहित शक्तियों के विकेंद्रीकरण के लिए एक विधेयक पेश करे।

Posted by on January 27, 2012. Filed under प्रमुख समाचार, समाचार. You can follow any responses to this entry through the RSS 2.0. You can leave a response or trackback to this entry

3 Responses to ग्रामसभा विधानसभाओं और संसद से ऊपर: अन्ना हजारे

  1. आओ !देखो! भारत के प्राणो में क्या उन्माद भरा है ।
    शासन के प्रतिबन्ध व्यर्थ है,और व्यर्थ है सब धारायें ,
    उन्हें तोङकर जनता के स्वर गुज रही हैं सभी दिशाएँ ।
    नारी कंण्ठ पुकार रही है ,उनके उपर हो रहे जुर्म मिटाओ ,
    जनता दाँत पिसती जाती , बंद हथेली उसकी खुल जाती ।
    पर नेता के शासन में,देश की जनता चुप बैठकर आज तमाशा देखती जाती ।
    एक हाथ जब उठता था,किसी देश भक्त नेता का, हाथ हजारो उठ जाते थे ,
    पर जब आज का नेता अपना हाथ उठाता है ,जनता के दुसरे हाथ में जूता-चप्पल उठ जाता है ।
    एक बार यदी उठ जाती, मिलकर आवाज ईस धरा से आती ।
    रख देती वह पीस भ्रश्टाचारी लोगो को, चटनी कर उसको खाती ।
    उठ नहीं रही है आवाज ईस धरा से,मैं क्या समझूँ सबको सूँघ गया है साँप ।
    आजाद देश की जनता हो गयी गुलाम, सरकारी कुत्ते जनता के चुने नुमाईन्दे हो गये है साँप ।
    सोचो, क्यो लोग अकारण ,आज गुलामी को अपनी ही मजबुरी बताएँ ।
    क्यों न हिन्दूस्तान की जनता मिलकर करे विरोध, सब अपना रोष जताएँ ।
    क्या हो गया है ,आज के ईस भारत को,यह भी चाहिए,वह भी चाहिए,सब कुछ चाहिए ।
    भुजा(हाथ)उठा कर नेता जनता से बोले,हमें सिर्फ़ वोट चाहिए वोट चाहिए ।
    आज देश की जनता की उठी भुजाएँ बोली,हमें सिर्फ़ नोट चाहिए नोट चाहिए ।
    पर सोचो ऎसे में इस देश क्या होगा, वह दिन दुर नहीं जब ब्लैक मनी सबकी जेब में होगा ।
    लाख तुम धर्मनिती की बाते कह डालो , फिर भी ब्लैक मनी कमाऊँगा ही ।
    और देश के लिए कुछ कर न सका तो क्या,अपनी सात पुश्ते बिठा कर खिलाऊँगा ही ।
    भरा कहाँ है, घडा पाप का उसको और भरना है, हर हिन्दूस्तानी को गुलाम बनाकर रखना है ।
    क्यों अपनी पुण्य-भूमि को अपने ही पापी दल करें कलंकित ?
    क्यों सच का दमन करें ये भोली-भाली जनता को करें आतंकित ?
    क्यों न बम से जला देते,उन भ्रश्टाचारी लोगों को, निर्दोष को बनाते अपना निशाना ।
    एक बार तो हमको दम दिखलाना ही होगा, अब नहीं चलेगा कोई बहाना ।
    क्या हो गया है ईस आजाद देश को,भ्रष्टाचार नंगा नाच रहा है ।
    भारत देश की जनता कि यह कैसी खामोशी ,सब कुछ भौचक्का देख रही है ।
    मैंने तो संकल्प कर लिया है, मरना तो है ही फ़िर डर-डर कर क्यों जिना ।
    ब्यर्थ है अपनो का मोह, छोड.प्राण के पंछी सभी को एक दिन है जाना ।
    भूल न पायें जिसको सदियाँ, ऎसी क्रान्ती ज्योंति लेखनी जनता तक पहूँचाऊगा ।
    अगर बे मौत मर गया तो,इस शासन की जड. भी हिल जायगी ।
    मेरी क्रान्ती ज्योंति से आजाद हिन्दूस्तान के जीवन की फ़ुलवारी-सी खिल जायेगी ।
    यह मिट्टी जो अमर शहिदों की, अपबित्र हो गयीं है भ्र्ष्टाचारी लोगों से ।
    उसकी आजादी के लिए ,इस पर प्राण निछावर करते मन न तनिक हिचके ।
    यह डर निकाल फेंको तुम अपने जीवन से, नहीं अधिकार और किसी का मेरे जीवन पर ।
    भुल कर भी मत देना अधिकार अपने जीवन के ,जोर नहीं और किसी का मेरे जीवन पर ।
    धिक्कार है ऎसे जीवन को जहाँ ,आजादी का कोई मोल नहीं ।
    चिकनी-चुपडी. बातों से ईस देश का, अब उध्द्दार नहीं ।
    ईन्सानों के दिलों में अब कोई देश प्रेंम का मोंल नहीं ।
    जब से हिन्दूस्तान की आजादी को, बेईमानों ने अपना आशियाना बनाया ।
    तब से अब तक एक भी माँई का लाल , लाल बहादुर , नेता सुभाष नहीं आया ।
    भाषण से ही जनता को बेवकुफ़ बनाया जाता ,वहीं दुसरे दीन मिडियाँ और प्रेंस में दिखाया जाता ।
    आज का दौर
    यह देश है बेईंमानो का रिश्व्वतखोरो का भ्रष्टाचारी लोगों का ,ईस देश का यारों क्या कहना ।
    यहाँ चौड्य़ी छाती नामीं गुन्डों की,भोली शक्लें चोरों की ।

    jay hind yadav
    January 27, 2012 at 3:45 pm

  2. यदी मेरा मैसेज मिडियां तक पहूच रहा है तो कॄपया ईमानदारी की उस दिवार तक पहूचाने की कोशिशः करें. जिसे अन्ना नाम दिया गया है मुझे कोई बेईमानी की दांग लगा कर दिखाएं फ़िर नेताओं को दिखादूगां ईमानदारी पर भ्रश्टाचार का कोई अमोघ शस्र्त्र नहीं है जो ईसे काट सके .आज भ्रश्टाचार के खिलाफ़ लड्ने के लिए हमारे जैसो को उस दिवार को जरुरत है कॄपया हमारी आवाज को आप सब के सहारे की जरुरत है क्या मिडियां ऎसे लोगो की भी मदद करती है या फिर वीआईपी लोगो से हि अपना नाता रखती है हमारे लेख.. देखकर मिडियां कहती है कि उसे अपना चैनल या फ़िर प्रेस नहीं बंद करवाना है क्या है मेरे ईस लेख में ?
    प्रबल प्रताप सिंह ?मै मानता हूं आप सब काफ़ी हद तक अच्छा काम करते है लेकिन मेरा अनुभव अभी तक विश्वास नहीं पाया ?शम्स ताहिर खान , आप जैसे लोग हमारे जैसे लोगो कि आवाज को देश की जनता तक नहीं पहुचायेंगे तो कौन पहुचायेगा .क्यों नहीं आगे आते .

    विश्णू पवार जी शर्मा जी ने मेरा पगार रोंक दिया है उनका कहना है कि तुम जैसे आये थे वैसे पगार मांगो तुम्हारी वजह से कम्पनी का नुकसान हुआ है क्या आप कुछः कोशिश करेंगॆ ?

    jay hind yadav
    January 27, 2012 at 3:46 pm

  3. whatever annaji is saying that is moraly right but practicaly not possible. Becouse leading to a nation which is very diversify through gram sabha where many people has many views and thoughts is very dificult.we cannot reach on a particular conculsion through gram sabha.

    Munendra Kumar
    January 27, 2012 at 5:47 pm

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